पानी पीने का सही तरीका



क्या आप पानी पीने का सही तरीका जानते हैं? जानें- कब और कितनी मात्रा में पीना चाहिए… भूल से भी न करें ये 5 गलतियां

How to Drink Water : खाना खाने के तुरंत पहले पानी नहीं पीना चाहिए. आयुर्वेद में बताया गया है कि हमारे पेट में क्षुदा ​अग्नि के कारण हमें भूख लगती है. अगर हम पानी पी लेते हैं तो यह क्षुदा ​अग्नि बुझ जाती है।


क्‍या आपको पानी पीने का सही तरीका पता है?

Water Drinking Standards : हमें जिंदा रहने के लिए सबसे जरूरी चीज चाहिए होती है, हवा हम हवा से ही ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं। सांस लेते हैं और जिंदा रह पाते हैं। हवा के बाद जो सबसे ज्यादा जरूरी दूसरी चीज होती है, वह है पानी। भोजन के बिना हम भले ही कुछ दिन जिंदा रह जाएं, लेकिन पानी के बगैर एक भी दिन जीना मुश्किल हो जाता है।

इंसानी शरीर के लिए पानी पीना कितना महत्वपूर्ण है, ये तो हम सभी जानते ही हैं। लेकिन क्या आपको पानी पीने का सही तरीका मालूम है ? बहुत सारे लोगा ये नहीं जानते हैं कि हमें हर दिन कितना पानी पीना चाहिए, खाना खाने के बाद या पहले पीना चाहिए, कैसे पानी पीना चाहिए…  

कि इन बातों के बावजूद औसतन कम से कम 5-6 गिलास पानी तो जरूर पीना चाहिए। यह औसतन है, संभव हो तो खूब पानी पीएं, खासकर गर्मी के मौसम में, इसलिए ज्यादा पानी पीने से आपको डिहाइड्रेशन की समस्या नहीं होगी। यानी शरीर में पानी की कमी नहीं होगी।


पानी पीने के बारे में आयुर्वेद में क्या लिखा है?

जिस तरह भोजन करने का एक सही समय और सही तरीका होता है, उसी तरह पानी पीने का भी सही समय और तरीका होता है। आयुर्वेद में पानी पीने ( How to drink Water ) के जरूरी नियम बताए गए हैं। कि आप जिस तरह से पानी पीते हैं, उसका आपकी सेहत पर असर पड़ता है. कब्ज (Constipation) की समस्या वाले लोगों को और ड्राई स्किन यानी शुष्क त्वचा (Skin Dry) वाले लोगों को ज्यादा पानी पीना चाहिए।


पानी पीते समय न करें ये गलतियां

1. आयुर्वेद के मुताबिक, खड़े होकर कभी भी पानी नहीं पीना चाहिए। हमेशा बैठकर आराम से एकदम रिलैक्स होकर पानी पीना चाहिए। बताया जाता है कि खड़े होकर पानी पीने से पानी हमारे शरीर की हड्डियों के जोड़ में असर पड़ सकता है, जिससे आर्थराइटिस का खतरा रहता है।

2. एक ही बार में 1 गिलास पानी पूरा नहीं पीना चाहिए।
जिस तरह खाने के बारे में कहा जाता है कि खाना चबा-चबा कर खाना चाहिए, उसी तरह एक बार में पानी पीने की बजाए एक-एक घूंट (Sip-Sip water) करके आराम से धीरे-धीरे पानी पीना चाहिए।

3. अक्सर गर्मियों में हम बाहर से आते हैं और फ्रिज में रखा पानी ( Chilled Water ) निकाल कर पी लेते हैं। आयुर्वेद के एक्सपर्ट बताते हैं कि हमें हमेशा रूम टेंपरेचर पर रखा हुआ पानी पीना चाहिए। आप हल्का गुनगुना पानी तो पी सकते हैं लेकिन बहुत चिल्ड या बर्फ वाला बहुत अधिक ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए।

4. खाना खाने के तुरंत पहले पानी नहीं पीना चाहिए. आयुर्वेद में बताया गया है कि हमारे पेट में क्षुदा ​अग्नि के कारण हमें भूख लगती है। अगर हम पानी पी लेते हैं तो यह क्षुदा ​अग्नि बुझ जाती है और हमारी भूख कम हो जाती है। 

5. पेट में उपजी क्षुदा ​अग्नि ही भोजन के पाचन में मदद करती है। इसलिए खाना खाने के तुरंत बाद भी पानी नहीं पीना चाहिए। ऐसा करने से पाचन की समस्या हो सकती है। इसलिए खाना खाने के बाद आधे घंटे का गैप रखने की सलाह दी जाती है। आधा घंटे बाद आप पानी पी सकते हैं।

किस मौसम में पिए कौनसे घड़े का पानी या किस धातु के बर्तन में पिए जानिए सबसे अच्छा पानी कौनसा !

भोजन, पानी और हवा अगर गुणवत्तापूर्ण नहीं हैं तो रोग उत्पन्न होते हैं। हिन्दू शास्त्रों और आयुर्वेद में इस संबंध में कई तरह की बातों का खुलासा किया गया है। सबसे जरूरी है पानी। पानी को प्राकृतिक तरीके से छानकर पीएं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कौन से मौसम में किस घड़े में पानी डालकर पीना चाहिए? यदि नहीं तो आज आप जानिए बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी। 

गर्मी का मौसम : प्राचीन भारत के लोग गर्मी के मौसम में मिट्टी के घड़े, मटके या सुराही का पानी ही पीते थे। अब यह प्रचलन सिर्फ गांव तक ही सीमित रह गया है। शहर में तो लोग फ्रिज का पानी पीते हैं, जो कि सबसे घातक है। दरअसल, गर्मी में मिट्टी के घड़े का पानी ही पीना चाहिए, क्योंकि घड़े में पानी की गुणवत्ता और बढ़ जाती है और वह ठंडा भी रहता है। कुछ लोग इस मौसम में चांदी के घड़े में पानी पीने की सलाह भी देते हैं। चांदी में भी पानी शीतल और स्वच्छ रहता है।
 
बरसात का मौसम : बरसात के मौसम में बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं इसीलिए इस मौसम में हमारे ऋषि-मुनि तांबे के बर्तन या घड़े में पानी पीने की सलाह देते हैं। तांबा अनावश्यक बैक्टीरिया को मारकर पानी को शुद्ध कर देता है।

सर्दी का मौसम : सर्दी के मौसम में सोने के घड़े या बर्तन में पानी पीना चाहिए। इससे शरीर में शीत नहीं जमती है और न ही कफ बढ़ता है। यह सर्दी-जुकाम और बुखार जैसे मौसमी रोगों से बचाता है। यदि सोने का कोई बर्तन नहीं है, तो पीतल या स्टील के बर्तन में सोने का एक टुकड़ा, अंगूठी, चेन आदि डालकर रखें और फिर उसका पानी पीएं।

सबसे अच्छा पानी : आयुर्वेद के अनुसार सबसे अच्छा पानी ग्लेशियर से निकलने वाली नदियों का, फिर तालाब का पानी, फिर बोरिंग का और पांचवां पानी कुएं या कुंडी का। यदि पानी खराब लगे तो उबालकर पीएं लेकिन ऑरो का पानी नहीं पीएं, क्योंकि ये पानी की क्वालिटी को बिगाड़ देते हैं


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